देहरादून

देवभूमि उत्तराखंड पवित्र स्थान श्री हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा के शीतकाल के लिए बंद हुए कपाट

कपाट बंद से पूर्व विधिवत गुरु दरबार में अरदास कर वाहेगुरु जी के जयकारों से गूंजा हेमकुंड साहिब

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। उत्तराखंड पवित्र स्थान श्री हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा आज शीत काल के लिए कपाट बंद किए गए हैं वहीं गुरुद्वारा साहिब के कपाट बंद होने से पूर्व समस्त प्रबन्धक कमेटी के सेवादार, पुलिस प्रशासन टीम की मौजूदगी में विधिवत रूप से गुरु दरबार में अरदास प्रार्थना करते हुए सुख समृद्धि की कामना की गई। वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा में इस वर्ष की अंतिम अरदास जो कि सेना के बैंड की गूंज, नम आँखों और वाहेगुरु जी के जयकारों के बीच शीतकाल के लिए कपाट बंद किए गए। वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा में रिकॉर्ड तोड़ 3.84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन करते हुए दरबार साहिब में माथा टेक पुण्य लाभ प्राप्त किया। वहीं पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे सहित हजारों श्रद्धालु एतिहासिक पलों के साक्षी बने
हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा यात्रा में बर्फीले रास्तों से लेकर अंतिम अरदास तक चमोली पुलिस और एसडीआरएफ ने सुरक्षा की कमान संभाली। हिमालय की गोद में लगभग 15000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब एवं पौराणिक श्री लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आज विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सेना के बैंड की मधुर धुनों,शब्द कीर्तन और अंतिम अरदास के बीच माहौल भावुक हो गया। वहीं आस्था सेवा और समर्पण के इस अद्भुत संगम के साथ इस वर्ष की यात्रा का समापन हुआ इस वर्ष 2026 में हेमकुंड साहिब की यात्रा 23 मई को प्रारम्भ की गई जिसमें यात्रा के आरम्भ से लेकर यात्रा के समापन तक 3.84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा में दर्शन किए। वहीं आज कपाट बंद होने के पावन अवसर पर गोविंद घाट (घांघरिया) से रागी जत्थे सहित हजारों श्रद्धालुहेमकुंड साहिब पहुंचे। वहीं इस अवसर पर पाकिस्तान से आया 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी शामिल रहा। वहीं हेमकुंड साहिब (घांघरिया )पुलिस चौकी प्रभारी अमनदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आज श्री हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा के शीतकाल हेतु कपाट बंद होने के अवसर पर प्रातः काल से गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक कार्यक्रम, शब्द कीर्तन, सुखमनी साहिब के पाठ, गुरु दरबार की महिमा का सुन्दर वर्णन किया गया। जिसके पश्चात विधिवत् रूप से दरबार साहिब में अंतिम अरदास कर कपाट बंद किए गए। इसके पश्चात हुक्मनामा लेकर पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब को पंज प्यारों की अगुवाई में सेना के बैंड की मधुर एवं गौरवशाली धुनों के बीच दीवान हॉल से सचखंड साहिब में सुशोभित कर अरदास की गई। हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा यात्रा के दौरान यात्रा मार्गो में बर्फबारी, कड़ाके की ठंड, और दुर्गम रास्ते हर चुनौती को उत्तराखंड पुलिस का सेवाभाव से स्वीकार कर बेहतर सेवाएं प्रदान कर पूर्ण रूप से योगदान रहता है। वहीं इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच मौसम की चुनौतियां भी कम नहीं रही समय समय पर भारी बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और फिसलन भरे दुर्गम रास्तों के बावजूद स्थानीय पुलिस और एसडीआरएफ के जवान लगातार अपनी पूर्ण जिम्मेदारी एवं निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के कुशल नेतृत्व एवं दिशा निर्देशन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवाजाही और यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर सतत निगरानी रखी गई। यात्रा के दौरान कठिन रास्तों पर पुलिस के जवानों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के दृष्टिगत हाथ थामकर सुरक्षित रास्तों तक पहुंचाया और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल तत्काल प्रभाव से सहायता उपलब्ध करवाते हुए मित्र पुलिस का फर्ज निभाया। वहीं हेमकुंड साहिब गुरूद्वारा यात्रा के दौरान चमोली पुलिस का विशेष सहयोग प्रदान करने पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा चमोली पुलिस टीम की कार्यशैली की सराहना की गई। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा एवं वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह द्वारा यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, मुस्तैदी और कुशल प्रबंधन के लिए प्रभारी निरीक्षक गोविंद घाट चित्रगुप्त सिंह तथा चौकी प्रभारी घांघरिया अमनदीप सिंह की विशेष रूप से सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया इस अवसर पर गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के मैनेजर मोनू सिंह, ग्रंथी हामिद सिंह, सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। वहीं श्रद्धालुओं ने भी चमोली पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों के सेवाभाव सहयोग और तत्परता की सराहना की दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए उत्तराखंड पुलिस जवानों ने साबित किया की खाकी केवल कानून व्यवस्था की प्रतीक ही नहीं बल्कि संकट की घड़ी में भी सहारा और मानवता की मिसाल भी है।

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