लखनऊ सनातन शोध एवं लेखन के लिए डॉ. श्वेता शर्मा को मिला भारतीय सनातन गौरव सम्मान
हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में विश्व हिंदू रक्षा परिषद की ओर से द्वितीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में भारत सहित 21 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सनातन संस्कृति, हिंदू समाज, राष्ट्र सेवा और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सम्मेलन में व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इसी अवसर पर सनातन संस्कृति के शोध, अध्ययन और लेखन के क्षेत्र में कार्य कर रहीं डॉ. श्वेता शर्मा को उनके योगदान के लिए भारतीय सनातन गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप, उसके ज्ञान एवं परंपराओं को व्यापक स्तर पर सामने लाने के साथ-साथ देश-विदेश में हिंदू समाज को एक साझा सांस्कृतिक एवं वैचारिक मंच प्रदान करना रहा। सम्मेलन के दौरान सनातन के संरक्षण एवं संवर्धन, युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और राष्ट्र सेवा की भावना को मजबूत करने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विषय को लेकर भी आगे कार्य करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। वक्ताओं ने सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों के शोध, अध्ययन, लेखन और दस्तावेजीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सनातन की समृद्ध ज्ञान परंपरा को प्रमाणिक रूप से संकलित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इसी दिशा में डॉ. श्वेता शर्मा द्वारा किए जा रहे शोध एवं लेखन कार्यों को सम्मेलन के मंच से सराहना मिली। सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और उनसे जुड़े विभिन्न विषयों पर उनके अध्ययन एवं शोध कार्यों के लिए उन्हें भारतीय सनातन गौरव सम्मान प्रदान किया गया। उनके कार्यों का उद्देश्य सनातन से जुड़े ज्ञान एवं महत्वपूर्ण विषयों को शोध और दस्तावेजीकरण के माध्यम से व्यवस्थित रूप से सामने लाना तथा आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना है।
इस अवसर पर विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोपाल राय जी ने डॉ. श्वेता शर्मा के शोध एवं लेखन कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सनातन के क्षेत्र में उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा तैयार किए जा रहे दस्तावेज एवं शोध सामग्री भविष्य में सनातन संस्कृति के अध्ययन, शोध एवं जागृति के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
सम्मेलन में देश-विदेश से आए अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों को सनातन संस्कृति, समाज और राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उसके प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि वर्तमान समय में सनातन की समृद्ध परंपरा और ज्ञान-विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शोध, लेखन और प्रमाणिक दस्तावेजीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है। इसके लिए देश और विदेश में विभिन्न स्तरों पर जागरूकता एवं रचनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस सम्मेलन ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए सनातन संस्कृति, हिंदू समाज की एकजुटता, राष्ट्र सेवा और सांस्कृतिक जागृति के प्रति सामूहिक संकल्प को मजबूत किया। सम्मेलन में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही विभूतियों के सम्मान के साथ कार्यक्रम ने सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सार्थक संदेश दिया।









