हरिद्वार

खबर का असर: अधिवक्ता की शिकायत पर मुख्य सचिव लेंगे संज्ञान

PMO ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को निस्तारण हेतु भेजी शिकायत

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। क्षेत्र की बदहाल सड़कों और अधूरे सीवर कार्यों से परेशान होकर एक अनूठे अंदाज में अपनी आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंचाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता हिमांशु सरीन की पहल अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई है। पूर्व में हरिद्वार की गूंज, HKG न्यूज पोर्टल (24*7) ने अधिवक्ता हिमांशु सरीन की शिकायत को लेकर टूटी पड़ी सड़कों की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका संज्ञान लेते उत्तराखंड मुख्य सचिव को निस्तारण के लिये शिकायत भेजी गई है।

वहीं अधिवक्ता हिमांशु सरीन ने ग्राम हरिपुर कलां, गायत्री तपोवन आश्रम के पीछे, ऋषिकेश क्षेत्र की जर्जर सड़कों, अधूरे विकास कार्यों और सीवर व्यवस्था में बरती जा रही लापरवाही को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें चाय पर आमंत्रित किया था। उनका कहना था कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं क्षेत्र में आकर यहां की सड़कों और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति देखेंगे तो आम जनता की परेशानियों का अंदाजा सहज ही लगा सकेंगे।

इस अनूठी पहल के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने उनके पत्र को शिकायत के रूप में स्वीकार करते हुए आवश्यक निस्तारण के लिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव को प्रेषित किया है। इस संबंध में जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु सरीन एडवोकेट को प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक पत्र के माध्यम से हुई है। हिमांशु सरीन ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि जनता की सेवा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों तक बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्थानीय लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। जब जिम्मेदार अधिकारी जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने में असफल दिखाई देते हैं, तब आम नागरिक को अपनी आवाज शासन और केंद्र सरकार के उच्च स्तर तक पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क निर्माण के नाम पर जगह-जगह खुदाई, अधूरे सीवर कार्य, टूटी सड़कें और लंबे समय से बनी अव्यवस्था स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। संबंधित विभागों और अधिकारियों को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करना चाहिए।

हिमांशु सरीन ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा शिकायत को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को भेजा जाना एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन उनकी लड़ाई केवल पत्राचार तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही क्षेत्र की टूटी सड़कों का निर्माण और अधूरे सीवर कार्यों को पूरा नहीं किया गया तथा स्थानीय लोगों को राहत नहीं मिली, तो वह क्षेत्रवासियों को साथ लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल की शरण में जाएंगे और जनहित में आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि जनता को विकास के नाम पर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर सुरक्षित सड़कें, बेहतर सुविधाएं और जवाबदेही चाहिए।

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