हरेला केवल पर्व नहीं, प्रकृति और संस्कृति का महापर्व
खानपुर रेंज में पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर हरिद्वार वन प्रभाग की खानपुर रेंज में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से भव्य पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इस अभियान में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक ममता राकेश, राष्ट्रीय निगरानी समिति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के पूर्व सदस्य मोहम्मद आरिफ चौधरी, ग्राम प्रधान शमशेर अली तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लेकर पौधे रोपण किए और उनकी सुरक्षा का संकल्प भी लिया है। कार्यक्रम के दौरान वन क्षेत्रीय अधिकारी प्रियांशु पांडे ने कहा कि हरेला केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति की आत्मा है। यह पर्व हमें प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सावन और मानसून की शुरुआत में लगाया गया पौधा सबसे अधिक जीवित रहता है, इसलिए यह समय वृक्षारोपण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज लगाया गया एक पौधा भविष्य की पीढ़ियों को शुद्ध हवा, स्वच्छ वातावरण, संतुलित जलवायु और बेहतर भूजल स्तर प्रदान करेगा। इस दौरान उन्होंने वनों में अवैध कटान करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक ममता राकेश ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में हरेला जैसे पर्व पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि केवल भाषणों से नहीं, बल्कि पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के संकल्प से ही धरती को सुरक्षित रखा जा सकता है। हरेला उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जो हरियाली, कृषि और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है। राष्ट्रीय निगरानी समिति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के पूर्व सदस्य मोहम्मद आरिफ चौधरी ने कहा कि हरेला पर्व हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और स्वच्छ वातावरण तैयार करने की अपील भी की है।

ग्राम पंचायत लालवाला खालसा के ग्राम प्रधान शमशेर अली ने कहा कि हरेला केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का जनआंदोलन है। उन्होंने ग्रामीणों से पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की, ताकि यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का स्थायी प्रयास बन सके। हरेला पर्व उत्तराखंड की पहचान और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। इस अवसर पर किया गया पौधारोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, हरियाली और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वन विभाग ने भी लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित रखने की अपील की है।









