हरिद्वार

लालढांग में ओवरलोड खनन वाहनों का कहर

वन चौकी से बेख़ौफ़ रोड पर दस्तक देते डंपर, जिम्मेदार विभाग सोएं कुंभकर्णी नींद

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जनपद के लालढांग और गैंड़ीखाता क्षेत्र में ओवरलोड खनन सामग्री से भरे डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। चर्चा है कि चिड़ियापुर रेंज की कटावढ वन चौकी से निकलकर यह भारी वाहन लालढांग और गैंड़ीखाता होते हुए उत्तर प्रदेश की ओर लगातार दौड़ रहे हैं, लेकिन उनकी जांच-पड़ताल लगभग शून्य है। क्षेत्रवासियों में चर्चा है कि जहां परिवहन विभाग की नियमित जांच की आवश्यकता है, वहां विभाग की मौजूदगी दिखाई नहीं देती। छोटे वाहनों के खिलाफ चालान और कार्रवाई तो होती है, लेकिन खनन सामग्री से भरे भारी वाहनों पर अधिकारियों की विशेष दया-दृष्टि बनी रहती है। जो क्षेत्रीय नगरिकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की चर्चा के अनुसार लालढांग क्षेत्र में संचालित दो खनन पट्टों से प्रतिदिन कई दर्जन डंपर और बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ओवरलोड होकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। इन वाहनों की तेज रफ्तार और भारी वजन से सड़क पर चलने वाले अन्य वाहन चालकों की जान जोखिम में बनी रहती है। फिर भी विभागीय प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं हैं। हालांकि हाल ही में हरिद्वार में तेज रफ्तार डंपर द्वारा एक बस को टक्कर मारने की घटना ने खनन वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर गंभीर सवाल खड़े कर रखे हैं। इस दुर्घटना में कई लोग घायल हुए थे और एक महिला को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि खनन पट्टा स्वामियों को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते नियमों की अनदेखी की जा रही है। चर्चा है कि अनुमति देने के बाद संबंधित विभाग केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। गैंड़ीखाता से लालढांग के बीच स्थित वन चौकी के रास्ते प्रतिदिन ओवरलोड डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें गुजरती देखी जा सकती हैं। चर्चा तो यहां तक है कि जहां खनन पट्टो को चलाने की अनुमति मिली है। उस क्षेत्र से अलग भी खनन माफिया खनन सामग्री उठा रहे हैं। इससे आशंका जताई जा सकती है कि यह अवैध खनन को भी हवा दी जा रही है। सवाल यह है कि जब नियमों के पालन और सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की है, तो आखिर इन ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं या फिर ओवरलोड वाहनों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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