हरिद्वार

अजरानंद अंध विद्यालय के दो बच्चों मिली रोशनी, यह चश्मा नहीं, नई उम्मीद

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। सेवा और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब वसुधैव कुटुम्बकम् फाउंडेशन (रजि.) के प्रयासों से अजरानंद अंध विद्यालय के दो दृष्टिबाधित बच्चों की जिंदगी में नई उम्मीद की किरण जगी। विशेष चश्मे मिलने के बाद 13 वर्षीय राजकुमार और 11 वर्षीय कृष्णा की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे अब उन्हें देखने में काफी राहत मिल रही है। यह सराहनीय पहल वसुधैव कुटुम्बकम् फाउंडेशन (रजि.) और ब्लड वॉलंटियर्स हरिद्वार के संयुक्त सहयोग से शुरू हुई। कुछ समय पूर्व अजरानंद अंध विद्यालय में एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा एक विशाल नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किया गया था, जिसमें विद्यालय के लगभग 65 दृष्टिबाधित बच्चों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान 6 बच्चों में उपचार की संभावना सामने आई, जिन्हें आगे की जांच और इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश बुलाया गया। एम्स में विस्तृत परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने बताया कि राजकुमार और कृष्णा की दृष्टि विशेष चश्मों की सहायता से बेहतर की जा सकती है। इसके बाद फाउंडेशन की उपाध्यक्ष निधि अग्रवाल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर व्यक्तिगत सहयोग से दोनों बच्चों के लिए विशेष चश्मों की पूरी व्यवस्था करवाई। जैसे ही बच्चों ने चश्मा पहनकर पहली बार साफ देखना शुरू किया, उनके चेहरे पर लौट आई मुस्कान ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। फाउंडेशन की उपाध्यक्ष निधि अग्रवाल ने कहा कि यह पल उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक था। उन्होंने कहा, जब बच्चों ने पहली बार चश्मा लगाकर साफ देखा और मुस्कुराए, तो लगा कि हमारी मेहनत सफल हो गई। यह केवल चश्मा नहीं, बल्कि उनके लिए नई उम्मीद और नई जिंदगी है। भविष्य में भी हम ऐसे शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक मदद पहुंचाने का प्रयास करेंगे। फाउंडेशन की सह-कोषाध्यक्ष पूजा अरोड़ा ने बताया कि ब्लड वॉलंटियर्स हरिद्वार के सहयोग से आयोजित यह पहला नेत्र शिविर था। बच्चों की जांच से लेकर उन्हें एम्स ले जाने और चश्मे उपलब्ध कराने तक पूरी टीम ने समर्पण के साथ कार्य किया। उन्होंने कहा कि बच्चों का अब पहचान कर नाम से पुकारना उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है। फाउंडेशन अध्यक्ष रेनू अरोड़ा ने निधि अग्रवाल और पूजा अरोड़ा के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि दोनों ने पूरे अभियान को एक मां की तरह संभाला। उन्होंने कहा कि संस्था को ऐसी कर्मठ और सेवाभावी मातृशक्ति पर गर्व है, जिनके प्रयासों से “सेवा ही धर्म” का संकल्प साकार हो रहा है।विद्यालय प्रबंधन ने भी फाउंडेशन, एम्स ऋषिकेश, निधि अग्रवाल एवं उनकी टीम और ब्लड वॉलंटियर्स हरिद्वार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल दृष्टिबाधित बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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