आरटीआई से बेनकाब हुआ पशु वैक्सीनेशन घोटाला
पशु विभाग में लाखों के फर्जीवाड़े से मचा हड़कंप, अपर निदेशक ने संभाली जांच
हरिद्वार की गूंज (24*7)
(फिरोज अहमद) लक्सर। हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में पशु वैक्सीनेशन के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले का खुलासा आरटीआई के तहत हुआ है। शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत सीधे पशुपालन विभाग मंत्री सौरभ बहुगुणा से की है जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। शिकायत के गंभीर होने पर अपर निदेशक पशुपालन विभाग गढ़वाल परिक्षेत्र भूपेन्दर सिंह जंगपांगी लक्सर पहुंचे और जांच में जुट गए हैं।

जानकारी के मुताबिक लक्सर के पूर्ण गांव निवासी एडवोकेट विनीत चौधरी ने आरटीआई के माध्यम से पशुपालन विभाग लक्सर से पशुओं में वैक्सीनेशन को लेकर सूचना मांगी थी। विनीत चौधरी ने बताया कि उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से वैक्सीनेशन से संबंधित विवरण मांगा था, लेकिन विभाग द्वारा लंबे समय तक सूचना दबाए रखी गई और टालमटोल की जाती रही। मजबूर होकर उन्होंने मामले की शिकायत सीधे विभागीय मंत्री से कर दी।

इसके बाद हरकत में आए विभाग ने आरटीआई से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए। दस्तावेजों के अवलोकन के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। विनीत चौधरी ने बताया कि विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में सैकड़ों ऐसे लोगों के नाम दर्ज मिले जो गांव के निवासी ही नहीं हैं। कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर पर कई लोगों के नाम से वैक्सीनेशन दिखाया गया, जबकि कुछ ऐसे नाम भी शामिल पाए गए जिनके यहां पशुपालन किया ही नहीं जाता शिकायतकर्ता का आरोप है कि अकेले भुरना गांव में ही पशु वैक्सीनेशन के नाम पर लाखों रुपये का घोटाला किया गया है।
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान उन्होंने सभी संबंधित दस्तावेज अपर निदेशक को सौंप दिए हैं। मामले की जांच के लिए पहुंचे अपर निदेशक भूपेन्दर सिंह जंगपांगी ने बताया कि भुरना गांव में वैक्सीनेशन को लेकर अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसकी आज जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति को वैक्सीनेशन का कार्य सौंपा गया था, उसे 4 हजार से अधिक वैक्सीन दी गई थीं। सरकार द्वारा प्रति वैक्सीन 5 रूपये का भुगतान किया जाना था, जिसे पूरा कर ऑनलाइन अपलोड किया गया है। अब सभी तथ्यों की स्थल पर जाकर गांव में जांच की जाएगी।

जब उनसे सवाल किय गया कि क्या इस जांच का सीधा असर राजकीय पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर पड़ेगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि देख रेख और निगरानी उनकी जिम्मेदारी है मामले की हर बिंदु पर गंभीरता से जांच की जाएगी। आरटीआई के जरिए सामने आए इस घोटाले ने न सिर्फ पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की सच्चाई भी उजागर कर दी है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।









