राज्यसभा में उठा मिशन वात्सल्य का मुद्दा, बच्चों की देखभाल और सुरक्षा पर सरकार का बड़ा बयान
राजेश पसरीचा देहरादून प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(राजेश पसरीचा) देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से मिशन वात्सल्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। उन्होंने बच्चों की देखभाल के लिए परिवार आधारित गैर-संस्थागत व्यवस्था को बढ़ावा देने, देशभर में स्थापित वात्सल्य सदनों की स्थिति तथा लापता बच्चों की ट्रैकिंग प्रणाली की प्रगति पर विस्तृत जानकारी मांगी।
डॉ. बंसल ने सरकार से पूछा कि बच्चों को संस्थानों में रखने के बजाय परिवार आधारित देखभाल को प्रोत्साहित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अब तक कितने वात्सल्य सदन स्थापित किए गए हैं और ट्रैक चाइल्ड पोर्टल तथा मिशन वात्सल्य पोर्टल के एकीकरण की स्थिति क्या है।
इस पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने विस्तृत जवाब देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मिशन वात्सल्य एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चों को आवश्यक सेवाएं प्रदान करना है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत बच्चों की गैर-संस्थागत देखभाल को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसमें प्रायोजन, पालन-पोषण, दत्तक ग्रहण और पश्चात देखरेख जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। पात्र बच्चों को इस योजना के तहत प्रतिमाह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाती है। मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक देशभर में कुल 69 वात्सल्य सदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित किए जा रहे हैं।
लापता बच्चों की खोज और प्रबंधन के विषय में उन्होंने बताया कि सरकार ने ट्रैक चाइल्ड पोर्टल, खोया-पाया एप और केयरिंग्स पोर्टल को एकीकृत कर एक समरूप मिशन वात्सल्य पोर्टल तैयार किया है। यह प्रणाली गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, राज्य सरकारों, बाल कल्याण समितियों और अन्य एजेंसियों के सहयोग से संचालित की जा रही है।
इसके अलावा, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लापता बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है, जिससे मामलों के त्वरित समाधान में मदद मिल रही है। सरकार का कहना है कि इन सभी प्रयासों के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनाया जा रहा है।









