रुड़की

मुकद्दस रमजान के बाद प्रत्येक रोजेदारों के लिए खास तोहफा है ईद का त्योहार

इमरान देशभक्त रुड़की प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त) रुड़की। पवित्र रमजान महीने के बाद सभी रोजगारों के चेहरे पर ईद की खुशी अलग ही देखने को मिलती है। रमजान के तीस रोजे रखने के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। पूरी दुनिया भर के मुसलमान इस त्योहार को रमजान के पूरे रोजे रखने के बाद जिस अंदाज में मनाते हैं वह अपने आप में अलग होता है।इस दिन जहां हर मुसलमान के घरों में मीठी सेवइयां और खीर बनाई जाती है, वहीं एक दूसरे को गले मिलकर बधाई भी दी जाती है। भारतवर्ष में मुस्लिम समुदाय इस त्योहार को बड़े सौहार्द और प्रेमभाव से मनाते हैं।यहां वे अपने हिंदू व सिख भाइयों को अपने घरों पर बुलाकर उनका मुंह मीठा कराते हैं तथा भाईचारे का संदेश देते हैं। इस्लाम में दो ही त्योहार आते हैं। एक ईद-उल-फितर और दूसरे ईद-उल-अजहा।ये त्योहार भाईचारे और सद्भाव का पैगाम देत हैं। इस दिन खुशियां बांटने और एक दूसरे को मुबारकबाद पेश करने का अवसर मिलता है। रहमानिया मदरसे के प्रधानाचार्य मौलाना अजहर उल हक बताते हैं कि यह दिन अल्लाह ताला से इनाम लेने का दिन है।ईद के मुबारक दिन पर सुबह के वक्त पूरे नगर के लोग ईदगाह में जमा होकर ईद की नमाज अदा करते हैं और नमाज से पहले हर मुसलमान के लिए फितरा अदा करना भी फर्ज है। फितरे के तहत हर मुसलमान को दो किलो अनाज या उसकी कीमत गरीबों को देनी है,जो इस बार लगभग पचास रुपए बनती है।ईद की नमाज से पहले जहां फितरा देना फर्ज है,वहीं जकात देना भी वाजिब है।इसका मकसद यह है कि गरीब व्यक्ति भी ईद की खुशी मना सके।ईद की नमाज के बाद इमाम साहब खुत्बा पढ़ते हैं और दुआ कराते हैं। खुतबा सुनना सभी नमाजियों के लिए बहुत जरूरी है। ईद की सबसे ज्यादा खुशी बच्चों के चेहरे पर देखने को मिलती है,ईद का दिन इसलिए कुछ और खास हो जाता है। मौलाना अरशद कासमी का कहना है कि रमजान माह में रोजेदार इंसान के दिमाग और उसके शरीर दोनों पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है।रोजा एक साल में आना ट्रेनिंग कोर्स है, जिसका उद्देश्य इंसान साल भर मनमानी जिंदगी की बजाय रब चाही जिंदगी व्यतीत करता है।रोजा इंसान में अनुशासन लाता है, ताकि इंसान अपनी सोच व काम को सही दिशा दे सके। इंसान के अंदर गुस्सा, इच्छा, लालच, भूख, सेक्स और तमाम भावनाएं रहती हैं, इन पर संयम बरतने की सूरत में लाभ और न बरतने पर हानि है, लेकिन रोजा इंसान को इन पर काबू करना सीखाता है, अर्थात रोजा इंसान को जुर्म और पाप से बचा लेता है। इंसान जान लेता है कि जब वह खान-पान जैसी चीजों को दिनभर छोड़ सकता है तो वह बुरी बातों और बुरी आदतों को भी बड़ी आसानी से छोड़ सकता है, जो इंसान भूख-प्यास को बर्दाश्त कर सकते हैं वह दूसरी बातें भी सहन कर सकता है।कह सकते हैं कि इस तीस दिनों के बाद इंसान में साहस और संयम की ताकत बढ़ जाती है। मुफ्ती मोहम्मद सलीम और कारी शमीम अहमद बताते हैं कि रोजेदार मतलब परस्ती और सस्ती से दूर हो जाता है।रोजा इंसान को अल्लाह का सच्चा शुक्रगुजार बनता है। रोजा अल्लाह का मार्गदर्शन मिलने पर उसकी तारीफ प्रकट करने, उसका शुक्र अदा करने और परहेजदार बनने के अलावा न केवल इंसान के दिमाग, बल्कि उसके शरीर पर भी बहुत अच्छा प्रभाव डालता है। वरिष्ठ समाजसेवी इंजीनियर मुजीब मलिक, डॉ० नैयर काजमी, अफजल मंगलौरी, हाजी मोहम्मद सलीम खान, हाजी नौशाद अहमद, सत्तार अली, शेख अहमद जमां, जावेद अख्तर एडवोकेट, हाजी मोहम्मद मुस्तकीम प्रशासक, कुंवर जावेद इकबाल, मोहम्मद मोफीक, मास्टर जमा हैदर, हाजी लुकमान उर्फ चुन्नू भाई, अमर मलिक, अलीम सिद्दीकी, हाजी महबूब कुरैशी, डॉक्टर मोहम्मद मतीन, इस्लाम कुरैशी, मुहम्मद जावेद फैंसी, जुनैद मलिक, रियाज कुरैशी, मोहम्मद मेहरबान, जहांगीर अहमद, जाकिर हुसैन व डॉक्टर मोहम्मद मोईन बताते हैं कि इस दिन की कुछ खास विशेषताएं होती हैं।सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज पढ़ने, खुद की सफाई करने,नए कपड़े पहनने,मिसवास करना, खुशबू लगाना और कुछ मीठा खाकर ईदगाह में ईद की नमाज पढ़ने जाना।

नगर की विभिन्न मस्जिदों में प्रातः ईद की नमाज का समय-
जामा मस्जिद सोत-7:30 बजे
मस्जिद शेख बेंचा-7:00 बजे
मस्जिद उमर बिन खत्ताब-7:15 बजे
ईदगाह रुड़की-8:45 बजे
ईदगाह रामपुर-8:15 बजे

एसपी देहात शेखर चंद सुयाल ने बताया कि ईद के अवसर पर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये हैं। मस्जिदों और ईदगाह के आसपास नमाजियों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। ईद के पर्व पर सभी लोग एक दूसरे के साथ भाईचारे का रिश्ता अपनाते हुए सौहार्द की मिसाल पेश करें। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रामचंद्र सेट, सीओ रुड़की नताशा सिंह, सिविल लाइन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप बिष्ट व गंगनहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मणिभूषण श्रीवास्तव ने भी सभी नगर वासियों को ईद की मुबारकबाद दी है।

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