700 किलोमीटर दूर बुंदेलखंड तक पहुंची हरिद्वार पुलिस, 25 दिन की पड़ताल के बाद सुलझी ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री
चंडी देवी दर्शन के बहाने हरिद्वार लाई गई महिला की गला घोंटकर हत्या, प्रेम प्रसंग बना कत्ल की वजह, तीन आरोपी गिरफ्तार
हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। पुलिस के लिए सबसे कठिन मामलों में गिने जाने वाले ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा कर हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर अपनी तकनीकी दक्षता और विवेचना क्षमता का परिचय दिया है। चंडी देवी मंदिर रोपवे के समीप घनी झाड़ियों में मिले एक अज्ञात महिला के सड़े-गले शव से शुरू हुई जांच ने आखिरकार 700 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र तक पहुंचकर इस सनसनीखेज हत्याकांड की पूरी कहानी उजागर कर दी है। 10 मई 2026 को थाना श्यामपुर क्षेत्र में चंडी देवी मंदिर के पैदल मार्ग के पास झाड़ियों में एक महिला का शव बरामद हुआ था। शव की हालत इतनी खराब थी कि पहचान करना लगभग असंभव था। घटनास्थल से टूटे मंगलसूत्र, कुंडल, सफेद गमछा और महिला के गले में कसकर बंधा ब्लाउज मिला, जिससे हत्या की आशंका प्रबल हुई। एसएसपी नवनीत सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विशेष टीम गठित कर जांच शुरू कराई। मृतका की पहचान ही पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। शव के हाथों पर गुदे हुए टैटू ही जांच की एकमात्र कड़ी थी। पुलिस ने सोशल मीडिया, गुमशुदगी रिकॉर्ड, निर्वाचन सूची, डीसीआरबी, एससीआरबी और एनसीआरबी के डाटा को खंगाला। कौशल्या नाम की 164 गुमशुदा महिलाओं और 3540 पंजीकृत महिलाओं का रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ लाखों मोबाइल नंबरों और लगभग 1.64 लाख संदिग्ध नंबरों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के लगभग 600 घंटे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी दौरान 8 मई की रात तीन संदिग्ध पुरुषों और एक महिला को चंडी देवी की ओर जाते हुए देखा गया, जबकि लौटते समय महिला उनके साथ नहीं थी। यही सुराग पुलिस को उत्तर प्रदेश के बांदा जिले तक ले गया। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सामने आया कि मृतका कौशिल्या निवासी बांदा का रामप्रकाश उर्फ गोविंदा से प्रेम संबंध था। पहले से शादीशुदा रामप्रकाश पर कौशिल्या विवाह करने का दबाव बना रही थी। इस दबाव से छुटकारा पाने के लिए रामप्रकाश ने अपने भाई राकेश और जीजा छेदीलाल के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। तीनों आरोपी कौशिल्या को चंडी देवी दर्शन कराने के बहाने हरिद्वार लाए और सुनसान स्थान पर गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों को विश्वास था कि घर से इतनी दूर हत्या करने पर न तो शव की पहचान हो पाएगी और न ही वह कानून के शिकंजे में आएंगे। लेकिन हरिद्वार पुलिस की अथक मेहनत, तकनीकी विश्लेषण और सटीक विवेचना ने उनकी इस योजना को विफल कर दिया। करीब 25 दिनों की लगातार पड़ताल के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में जेल भेज दिया है। इस उल्लेखनीय सफलता पर गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने पुलिस टीम को पांच हजार रुपये तथा एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह ने ढाई हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की है। यह खुलासा न केवल हरिद्वार पुलिस की पेशेवर दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से वारदात को अंजाम दें, कानून के लंबे हाथ अंततः उन्हें पकड़ ही लेते हैं। पुलिस टीम पुलिस अधीक्षक अपराध निशा यादव, पुलिस अधीक्षक नगर अभय सिंह, क्षेत्राधिकारी नगर शिशुपाल सिंह नेगी, प्रभारी निरीक्षक CIU नरेन्द्र सिह बिष्ट, थानाध्यक्ष श्यामपुर नितेश शर्मा, व0उ0नि0 मनोज रावत, उ0नि0 सन्तोष सेमवाल, उ0नि0 मोहन कठैत, म0उ0नि0 रचना पठानिया, अ0उ0नि0 रविन्द्र गौड, अ0उ0नि0 दरम्यान सिंह, हे0का0 प्रेम सिंह PS सिडकुल, हे0का0 पंकज देवली, का0 राहुल देव, का0 विनित कुमार, का0 अनिल रावत, का0 सुशील चौहान, का0 तेजेंद्र सिंह, का0 ओमवीर सिंह, का0 जितेंद्र घिल्डियाल, का0 अजय चौहान, का0 मनमोहन सिंह, म0का0 माधुरी त्रिपाठी, का0 वसीम CIU हरिद्वार, का0 उमेश CIU हरिद्वार, का0 हरवीर सिंह CIU हरिद्वार, का0 दीप गौड CIU हरिद्वार मौजूद रहे।









