हरिद्वार

समाचार पत्रों में खाद्य सामग्री परोसना, सेहत से खिलवाड़, आखिरकार क्यों

मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। आज भी शहर और कस्बों में बड़ी संख्या में दुकानदार खाने-पीने की चीज़ें समाचार पत्रों में लपेटकर ग्राहकों को दे रहे हैं। यह आम दिखने वाली आदत दरअसल लोगों के स्वास्थ्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है, जिस पर न तो पर्याप्त जागरूकता दिखाई देती है और न ही सख्त कार्रवाई। समाचार पत्रों में इस्तेमाल होने वाली स्याही (इंक) में कई प्रकार के हानिकारक रसायन पाए जाते हैं। जब गरम या तैलीय खाद्य पदार्थ इन कागज़ों में रखे जाते हैं, तो यह स्याही सीधे खाने में मिल जाती है। ऐसे में यह खाद्य पदार्थ शरीर में जाकर धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की स्याही में मौजूद केमिकल्स पेट संबंधी रोग, एलर्जी और लंबे समय में अन्य गंभीर जैसे कैंसर, पाचन विकार, हार्मोनल असंतुलन, किडनी की क्षति और त्वचा में जलन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इसके बावजूद बाजारों में समोसा, पकौड़ी, मिठाई, नमकीन जैसी वस्तुएं खुलेआम अखबारों में परोसी जा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पर रोक क्यों नहीं लग पा रही है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले, लेकिन ज़मीनी स्तर पर न तो कोई ठोस अभियान नजर आता है और न ही प्रभावी कार्रवाई। न दुकानदारों को जागरूक किया जा रहा है और न ही नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। आवश्यकता इस बात की है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इस पर सख्त कदम उठाएं। दुकानदारों को अखबार की जगह फूड-ग्रेड पेपर या अन्य सुरक्षित विकल्प इस्तेमाल करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही आम जनता को भी जागरूक किया जाए कि वह ऐसे पैकिंग में खाद्य सामग्री लेने से बचें। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।

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