संन्यासी प्रजा और हर समाज के हितैषी: स्वामी यतीश्वरानंद
वेद मंदिर आश्रम में संन्यासियों की बैठक में युवा पीढ़ी को नशा के साथ कुरूतियों से दूर रहने को दी सलाह

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(चिराग कुमार) हरिद्वार। वेद मंदिर आश्रम में हुई बैठक में सभी संन्यासी सभासदों ने वेदों सहित संस्कारवान शिक्षा, नशे एवं कुरूतियों से दूर रहने, परिवार में अच्छे गुणों के साथ आगामी पीढ़ियों को संस्कारवान बनाने पर जोर दिया। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि संन्यासियों को गांव—गांव पहुंचकर स्कूलों में वेदों का प्रचार करते हुए संस्कारवान शिक्षा और नशा एवं कुरूतियों के खिलाफ युवा पीढ़ी को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि संन्यासियों को एक मंच पर लाकर उनमें एकरूपता लाकर मानवता के लिए कार्य करना ही उनका ध्येय होना चाहिए। रविवार को वेद मंदिर आश्रम में आर्य समाज के संन्यासियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि आर्य समाज में युवा संन्यासियों का अभाव है। संन्यासी प्रजा के हितैषी हैं। सभी संन्यासियों को एक मंच पर लाने का काम महत्वपूर्ण है और उन्हें आर्य समाज के सिद्धांतों के अनुसार तैयार करते हुए समाजों के फैली विसंगितयों को दूर कराने का काम सौंपा जाए, ताकि युवा पीढ़ियां भ्रमित न हो, बल्कि संस्कारवान हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए भी रूपरेखा बनाने की जरूरत है। शिक्षा में कुछ कुरूतियां है, मानव मन में जो भ्रष्टाचार पनप रहा है उसे भी दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार जो निर्णय एक घंटे में ले सकती है, उसे पारित करने के लिए जनता को लंबे समय तक आंदोलन करना पड़ता है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने संन्यासियों का चरित्र उत्तम होने की बात कहते हुए कहा कि उन्हें गुटों में नहीं बटना चाहिए। युवाओं को केंद्रित करते हुए शिक्षा, चिकित्सा के साथ संसाधनों के नियम तय करने होंगे। स्वामी योगेश्वरानंद ने कहा कि संस्कारों को जगाने की जरूरत है। आगामी पीढ़ी के परिवार पर ही संस्कारवान शिक्षा, परिवार के अच्छे गुण, चरित्र निर्भर है। उन्होंने दोबारा से गुरुकुल पद्धति शिक्षा को अपनाने पर जोर दिया। संचालन करते हुए स्वामी ओमानंद ने कहा कि जय बोलने का मतलब है कि महापुरुषों के सिद्धांतों को अपने जीवन में अनुशरण कर उनका आचरण करें। संन्यासी अंधकार से उजाला की ओर ले जाते हैं। संन्यासियों को मानसिक गुलामी से भी दूर होना होगा और मानवता की भलाई के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि दवा से तो कोई भी ठीक कर सकता है लेकिन उसका कारण भी ढूंढना चाहिए। बैठक में संन्यासियों में स्वामी सुरेंद्रानंद, स्वामी चेतनानंद, भगवान देव, शिव मुनि, प्राणदेव, शुदृध बोधानंद, सोमानंद, चेतन देव, स्वामी योगेश्वरानंद, कृष्णानंद, मेघानन्द, वेदामृतानंद, विशेषानंद, प्रेममुनि, स्वामी भगवानदेव, स्वामी चेतरूप आदि गणमान्य संन्यासी शामिल हुए।









