डॉ० नरेश चौधरी ने कुंभ की परंपराओं, श्रद्धालुओं के मनोविज्ञान और पुलिस की भूमिका पर डाला प्रकाश
मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। कुंभ मेला प्रशिक्षण 2027 के अंतर्गत सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, हरिद्वार में प्रशिक्षण के चतुर्थ चरण में 300 पुलिस कर्मी छह दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी चरण के दौरान इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखंड के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) नरेश चौधरी ने दो बैचों के पुलिस कर्मियों को कुंभ मेले से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. नरेश चौधरी ने कुंभ मेले के इतिहास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं तथा कुंभ की संकल्पना पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं रहती, बल्कि वह श्रद्धालुओं की सुरक्षा, मार्गदर्शन, संकट प्रबंधन और मानव सेवा की महत्वपूर्ण कड़ी बन जाती है। उन्होंने कहा कि कुंभ को समझना केवल यह जानना नहीं है कि करोड़ों लोग नदी में स्नान के लिए एकत्र होते हैं। कुंभ को समझने के लिए श्रद्धालुओं के मनोविज्ञान, उनकी आस्था, साधु-संतों की परंपराओं, अखाड़ों की व्यवस्था और विशाल भीड़ को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित करने की प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। डॉ. चौधरी ने कहा कि कुंभ केवल स्नान का पर्व नहीं, बल्कि आस्था का महासंगम है। यह संतों और साधुओं का संगम, विभिन्न परंपराओं का संगम, ज्ञान-दर्शन का संगम तथा भारत की विविध संस्कृतियों और करोड़ों श्रद्धालुओं की सामूहिक आस्था का अद्भुत प्रदर्शन है। उन्होंने बताया कि कुंभ की परंपरा को यूनेस्को ने भी भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कुंभ के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पक्ष अमृत (शाही) स्नानों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही अखाड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका, उनके इतिहास तथा कुंभ मेले में पुलिस के लिए अखाड़ों की परंपराओं और व्यवस्थाओं को समझना क्यों आवश्यक है, इस विषय पर भी विशेष व्याख्यान दिया। डॉ. नरेश चौधरी ने वर्ष 1986 के कुंभ, 1992 के अर्द्धकुंभ, 1998 के कुंभ, 2004 के अर्द्धकुंभ, 2010 के कुंभ, 2016 के अर्द्धकुंभ और 2021 के कुंभ सहित प्रयागराज, उज्जैन एवं नासिक में आयोजित कुंभ मेलों में स्वयं किए गए कार्यों एवं अनुभवों को भी प्रशिक्षणार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने पुलिस कर्मियों से अपील की कि कुंभ मेले के दौरान वे श्रद्धालुओं के साथ संवेदनशीलता, धैर्य और सेवाभाव के साथ व्यवहार करें, ताकि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।









