हरिद्वार

कांवड़ यात्रा में एम सील ने बनायी गुमनाम हीरो के रूप में पहचान

नीटू कुमार हरिद्वार संवाददाता

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(नीटू कुमार) हरिद्वार। इस वर्ष की कांवड़ यात्रा के दौरान एम सील ने गुमनाम हीरो के रूप में पहचान स्थापित की है। कांवड यात्रा के नियम बहुत सख्त हैं। कांवड़ में ले जाए जा रहे पवित्र गंगा जल के पात्र को कभी भी ज़मीन पर नहीं रखना, उसमें से एक बूंद भी गंगा जल छलकना नहीं चाहिए। कठिन नियमों का पालन करते हुए कांवड़ियों ने भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था के साथ उबड़-खाबड़ रास्तों और मानसून के कठिन मौसम में रिसाव-मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने के लिए एम सील की सीलिंग शक्ति पर अपना अपार भरोसा जताया है। आमतौर पर प्लंबिंग की मरम्मत और औद्योगिक रिसाव को रोकने के लिए उपयोग किए जाने वाले एम सील ने आस्था के एक लचीले माध्यम के रूप में एक अनूठी और अभिनव भूमिका खोजी है। भक्त इस एपॉक्सी कंपाउंड (गोंद/सीलेंट) का उपयोग अपने प्लास्टिक और धातु के कलशों (जल के बर्तनों) के ढक्कनों और जोड़ों को मजबूती से सुरक्षित करने के लिए करते हैं, जिससे रोज़मर्रा के डिब्बे मजबूत और स्पिल-प्रूफ (छलकने से सुरक्षित) ट्रैवल गियर में बदल जाते हैं। आस्था, विश्वास और धैर्य से प्रेरित कांवड़ यात्रा में एम सील चुपचाप एक रीसीलेंट समर्थक की भूमिका निभाता है। इसके साथ ही यह प्रोडक्ट साबित करता है कि जब इनोवेशन वास्तविक जीवन की उपयोगिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगता है, तो वह सिर्फ एक उत्पाद होने से कहीं आगे निकल जाता है।

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