भारतीय मजदूर संघ का राष्ट्रव्यापी आंदोलन सफल
उत्तराखंड में श्रमिकों की समस्याओं और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठी बुलंद आवाज
हरिद्वार की गूंज (24*7)
(नीटू कुमार) हरिद्वार। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के अखिल भारतीय आह्वान पर 17 अगस्त 2026 को देशभर के जिला मुख्यालयों पर श्रमिकों की ज्वलंत समस्याओं, सामाजिक सुरक्षा एवं विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया गया। इसी क्रम में हरिद्वार में भी भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान श्रमिकों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
हरिद्वार में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री सुमित सिंघल के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशन में जनपद इकाई के नेतृत्व में चिन्मय डिग्री कॉलेज से जिलाधिकारी कार्यालय, रोशनाबाद तक विशाल बाइक रैली निकाली गई। रैली में विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के श्रमिकों, भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध यूनियनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर श्रमिक एकता का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री सुमित सिंघल ने उत्तराखंड के श्रमिकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि प्रदेश में श्रमिकों की शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान को लेकर श्रम विभाग की कार्यप्रणाली के प्रति श्रमिकों में गंभीर असंतोष है।
उन्होंने कहा कि अनेक मामलों में श्रमिकों को समय पर न्याय नहीं मिल रहा है तथा उनकी शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। श्रम कानूनों का उद्देश्य श्रमिकों को संरक्षण और न्याय देना है, न कि उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगवाना।
उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ द्वारा पूर्व में भी माननीय मुख्यमंत्री जी के समक्ष श्रम विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच एवं दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग रखी जा चुकी है। सरकार को चाहिए कि श्रमिकों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जहां अधिकारियों की लापरवाही, पक्षपात अथवा श्रमिक हितों की अनदेखी सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रमिक किसी के रहमोकरम पर नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के आधार पर न्याय मांगता है। सरकार एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है कि श्रमिकों को समयबद्ध, निष्पक्ष एवं प्रभावी न्याय मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र वार्ता प्रारंभ नहीं की गई और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली में ठोस सुधार नहीं किया गया, तो भारतीय मजदूर संघ इससे भी व्यापक एवं निर्णायक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
वहीं दूसरी ओर डी.सी नौटियाल ने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी तंत्र को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। श्रमिक अपनी मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, इसलिए उसकी शिकायतों और अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए भारतीय मजदूर संघ निरंतर संघर्ष करता रहेगा।
वहीं टंकार कौशल ने कहा कि श्रमिकों की वर्षों से लंबित मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। महंगाई के वर्तमान दौर में श्रमिकों के लिए सम्मानजनक वेतन और पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों को केवल आश्वासनों तक सीमित न रखकर उनका धरातल पर समाधान किया जाना चाहिए। साथ ही पवन कुमार ने कहा कि श्रमिकों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, यह व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है। श्रम विभाग को श्रमिकों की शिकायतों का समयबद्ध एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
वहीं इन्द्रपाल शर्मा ने कहा कि श्रमिकों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, EPF, ESIC तथा समान कार्य के लिए समान वेतन जैसी मांगें श्रमिकों के सम्मानजनक जीवन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से श्रमिकों की आवाज को लगातार मजबूती से उठाता रहेगा।
इस अवसर पर अनिल कुमार ने EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन के मुद्दे पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें अतीत के पन्नों को पलटना होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के जनवरी एवं फरवरी माह में, जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में नहीं थी और विपक्ष में थी, तब EPS-95 के तहत मात्र ₹1,000 न्यूनतम पेंशन को मजदूरों के साथ अन्याय बताते हुए इसे बढ़ाकर महंगाई भत्ते (DA) के साथ कम से कम ₹3,000 करने की मांग जोर-शोर से उठाई गई थी।
उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि जब वही नेतृत्व पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में आया, तो 2 मई 2016 को EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 निर्धारित कर दी गई और इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। अनिल कुमार ने सवाल उठाते हुए कहा कि “जो मांग विपक्ष में रहते हुए जायज थी, वह सत्ता में आने के बाद मात्र ₹1,000 पर क्यों सिमट गई? क्या हमारे बुढ़ापे की सुरक्षा का मूल्य इतना ही कम है?”
उन्होंने कहा कि आज महंगाई के दौर में ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन से किसी बुजुर्ग श्रमिक का सम्मानजनक जीवन चलाना संभव नहीं है। EPS-95 पेंशनभोगियों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए न्यूनतम ₹7,500 पेंशन +DA तथा चिकित्सा सुविधा की मांग पूरी की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ श्रमिकों एवं पेंशनभोगियों के हितों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा तथा सरकार से मांग करता है कि EPS-95 पेंशन की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए। सुमित सिंघल ने कहा कि भारतीय मजदूर संघ की प्राथमिकता केवल वेतन बढ़ाना नहीं, बल्कि श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल, न्यायपूर्ण वेतन और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास में श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कारखानों, उद्योगों, निर्माण स्थलों, परिवहन, बैंकिंग तथा विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाला श्रमिक अपने श्रम और पसीने से राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। इसलिए श्रमिकों की जायज मांगों को नजरअंदाज करना राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण शक्ति की उपेक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि “राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की भागीदारी” भारतीय मजदूर संघ की मूल भावना है। संगठन श्रमिकों के अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगा।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन के माध्यम से भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि श्रमिकों की लंबित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, श्रम कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए तथा श्रमिकों की शिकायतों के निस्तारण के लिए जवाबदेह, पारदर्शी एवं समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए।
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि श्रमिकों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी जायज मांगों का समाधान नहीं होता।









