हरिद्वार

गौतम खट्टर एवं माधव खट्टर की तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए: आर्य प्रवीण वैदिक

गगन शर्मा हरिद्वार संवाददाता

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व कोषाध्यक्ष आर्य प्रवीण वैदिक ने गोवा सरकार द्वारा सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने वाले गौतम खट्टर एवं उनके भाई माधव खट्टर की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की हैं। आर्य प्रवीण वैदिक ने कहा कि यह सरकार की परतांत्रिक सोच का परिचायक है जो जताता है कि भारत अभी अंग्रेजों से स्वतंत्र नहीं हुआ है अपितु भारत में केवल सत्ता हस्तांतरण हुआ है। यह घटना बताती है कि एक व्यक्ति विशेष गौतम खट्टर को कैद नहीं किया गया है अपितु सनातनी विचारधारा को और बहुसंख्यक वर्ग की भावनाओं को कैद किया गया है। स्वतंत्र भारत में आज भी ईसाई मिशनरीज का इतना प्रभाव है कि जब भी कोई इनके द्वारा गुपचुप लालच और भय दिखाकर किए जाने वाले धर्मांतरण की पोल खोलता है तो मानो उसको गिरफ्तार करना तय है और यदि उनके द्वारा किए गए धर्मांतरण का जब भी कोई घर वापसी अर्थात शुद्धिकरण का अभियान चलाता है तो सरकारें उनकी जमानत होने नहीं देती। हरिद्वार से शिक्षित दीक्षित गौतम खट्टर देश में अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा रहे हैं यह हरिद्वार के लिए गर्व और गौरव की बात है, हरिद्वार वासियों को उनके लिए उड़ खड़ा होना चाहिए। सनातन धर्म परिषद के कार्यक्रम में गौतम खट्टर द्वारा फ्रांसिस जेवियर द्वारा किए गए अत्याचारों का मात्र जिक्र करना गोवा पुलिस को रास नहीं आया। गोवा पुलिस द्वारा वहां पर कानून और व्यवस्था के खराब होने की मात्र काल्पनिक आशंका पर गौतम खट्टर और उनके भाई माधव खट्टर को गिरफ्तार कर लेना प्रशासन की पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इतिहास साक्षी है कि पुर्तगालियों द्वारा धार्मिक न्यायालय के नाम पर हिंदुओं को उनकी परंपराओं से रोकना, हिन्दु अपने घर के चबूतरे पर तुलसी नहीं लगाएंगे, माथे पर तिलक नहीं लगाएंगे, मंगलसूत्र नहीं पहनेंगी, मांग सिंदूर नहीं डालेंगे, शिखा-चोटी नहीं रखेंगे, यज्ञोपवीत धारण नहीं करेंगे और यदि करेंगे तो उनको जलाकर दंड देने तक की व्यवस्था धार्मिक न्यायालय के नाम पर दी जाती थी। औपनिवेशिक काल में धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए थे। ऐसे विषयों पर चर्चा करना लोकतांत्रिक समाज में स्वाभाविक और आवश्यक है। परंतु आज भी यदि इन मुद्दों को उठाने पर कार्रवाई होती है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। इस घोर अन्याय पर कोई बोलने नहीं देता। आज स्वतंत्र भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन केवल हिंदुओं के लिए दिखाई देता है। हिंदू देवी देवताओं को कोई भी कुछ कह दे दे, कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन दूसरे मत पंथ संप्रदायों के बारे में वास्तविक आधार पर तथ्यात्मक और ऐतिहासिक सत्य को बोलना अपराध बन जाता है। ऐसी दंडात्मक कार्यवाही किसी भी सत्य आंदोलन को दबाने के बजाय उसे और अधिक सशक्त बनाती हैं। गौतम खट्टर की इस गिरफ्तारी ने उनके विचारों और अभियान को और अधिक बल प्रदान किया है।
आर्य प्रवीण वैदिक कहते है कि vo इस प्रकार की कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हैं और केंद्र सरकार से मांगें रखी है कि गौतम खट्टर एवं माधव खट्टर की तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण हो सके। सर्वोच्च न्यायालय इस प्रकार की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेकर नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे। आर्य प्रवीण वैदिक ने कहा कि वो लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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