तालाब की भूमि पर भू-माफियाओं की टेढ़ी नज़र, तिरुपति कॉलोनी में मिट्टी डालकर तालाब को किया समतल, अब प्लॉटिंग की चर्चाएं तेज
मोहम्मद आरिफ उत्तराखंड क्राइम प्रभारी

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। सरकारी भूमियों पर अवैध कब्जों और उन्हें खुर्द-बुर्द करने का खेल किस कदर फल-फूल रहा है इसकी एक ओर गंभीर तस्वीर दादूपुर गोविंदपुर गांव से सामने आई है। अवैध तरीके से विकसित हई तिरुपति कॉलोनी में स्थित तालाब में मिट्टी डालकर बराबर किए जाने और उस पर दोबारा कब्जा व प्लाटिंग करने की तैयारी की चर्चाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों में चर्चा है कि जिस भूमि पर कभी तालाब हुआ करता था उसे मिट्टी से भरकर समतल कर दिया गया है। चर्चा है कि इस बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की टेढ़ी नज़र है और भू-भूमिया प्लॉटिंग करने की फिराक में षड्यंत्र रच रहे हैं। गौरतलब है कि तिरुपति कॉलोनी में स्थित तालाब की लगभग साढ़े सात बीघा भूमि को कब्जाने का मामला पहले भी खुब सुर्खियों बटोर चुका है। और चर्चा है कि पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे ने तालाब की भूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए सख्त कदम भी उठाया था। उन्होंने संबंधित तालाब भूमि पर बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे। ताकि तालाब भूमि की पहचान बनी रहे और उस पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा न हो सके। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ भूमि कारोबारियों की नज़र इस जमीन पर लगातार बनी हुई है और मौका मिलने पर यहां प्लॉटिंग करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि इन चर्चाओं और आशंकाओं की वास्तविकता राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों में चर्चा है कि उस समय प्रशासन द्वारा केवल बोर्ड लगाने के निर्देश पुरी जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि तालाब की वास्तविक स्थिति को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए थे। चर्चा यह भी है कि दादूपुर गोविंदपुर के लगभग साढ़े सात बीघा जोहड़ (तालाब) की जमीन पर कथित प्लॉटिंग और कब्जे का मामला पहले भी खूब चर्चित रहा है। और इस प्रकरण में दो फर्जी लेखपालों के जरिए काम को अंजाम दिए जाने के आरोप भी सामने आए थे। जिसका तत्कालीन प्रशासन ने संज्ञान लिया व भूमि को सरकारी कब्जे में लेने और बोर्ड लगाने के निर्देश दिए थे। जो बड़े समाचार पत्रों में प्रकाशित भी हुआ और उक्त मामले ने खूब सुर्खियां भी बटोरी थी। लेकिन एक बार फिर भू-माफिया उक्त तालाब भूमि पर प्लाटिंग करने का षड्यंत्र रच रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तिरुपति कॉलोनी स्थित तालाब की भूमि की पैमाइश कराई जाए, राजस्व अभिलेखों में उसकी स्थिति स्पष्ट की जाए और मिट्टी से भरे गए तालाब की दोबारा खुदाई कराकर उसे उसके मूल स्वरूप में लाकर सौंदर्यकरण कराया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि जिस तालाब की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए पूर्व जिलाधिकारी ने बोर्ड लगवाया था, उसकी मौजूदा स्थिति की निगरानी कौन कर रहा है। और क्या प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर तालाब की खुदाई कराएगा या फिर सरकारी भूमि पर कब्जे की आशंकाओं को लेकर शिकायतों का इंतजार करता रहेगा। सरकारी तालाबों को बचाना केवल राजस्व विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जल संरक्षण और पर्यावरण के भविष्य से जुड़ा सवाल है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल जांच और कार्रवाई की जाए।









