नदी से रेत लेकर निकल रहे ओवरलोड डंपर, छोटे वाहनों पर संबंधित विभाग की सख्ती
रेत मिट्टी से लदे ड़ंपरों की मस्ती, क्या इन पर लागू नहीं कानून
हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। गढ़ मीरपुर नदी से रेत लेकर निकल रहे ओवरलोड डंपरों को लेकर क्षेत्र में बराबरी के कानून को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि नदी में खनन का पट्टा संचालित है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पट्टा मिलने का मतलब यह है कि संबंधित वाहन संचालकों को ओवरलोडिंग की छूट भी मिल गई है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर मुख्य मार्गों पर क्षमता से अधिक रेत और मिट्टी भरकर दौड़ रहे डंपरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नजर नहीं आ रही है। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि रेत मिट्टी से भरे भारी-भरकम डंपर दिन-रात मुख्य मार्गो पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक सामग्री भरी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त होने, यातायात प्रभावित होने और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। सबसे बड़ा सवाल आरटीओ विभाग की कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। चर्चा है कि विभाग छोटे वाहनों की चेकिंग के दौरान चालान और अन्य कार्रवाई में तेजी दिखाता है, लेकिन ओवरलोड रेत-मिट्टी से भरे बड़े डंपरों पर वैसी सख्ती दिखाई नहीं देती। यदि यह चर्चा सही है तो विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इन भारी वाहनों की नियमित जांच क्यों नहीं हो रही है। खनन पट्टा अपनी जगह है और परिवहन नियम अपनी जगह। किसी भी वाहन को निर्धारित भार क्षमता से अधिक माल ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में खनन विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि नदी से निकलने वाले वाहनों की जांच करें और ओवरलोडिंग पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। सवाल यह भी है कि जब मुख्य मार्गों पर दिन-रात भारी डंपरों की आवाजाही हो रही है तो संबंधित विभागों की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ रही। क्या विभागों के पास इन वाहनों के वजन की जांच करने की व्यवस्था नहीं है या फिर कार्रवाई का इंतजार किसी बड़े हादसे के बाद ही किया जाएगा। क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि गढ़ मीरपुर नदी से निकलने वाले सभी डंपरों की धर्मकांटे पर वजन जांच कराई जाए, वाहनों की निर्धारित क्षमता और खनन से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल हो तथा ओवरलोडिंग पाए जाने पर बिना किसी भेदभाव के चालान और नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इन शिकायतों का संज्ञान लेकर जांच और कार्रवाई करते हैं या फिर ओवरलोड डंपरों की आवाजाही इसी तरह जारी रहती है। कानून सभी के लिए बराबर है, चाहे वाहन छोटा हो या बड़ा और चाहे उसके पीछे खनन का पट्टा ही क्यों न हो।









