कलम की साख तार-तार….शहर में चर्चा
त्योहारों पर कुछ पत्रकारों की मौज, हरे, पीले, सफेद लिफाफे देख खिले चेहरे

हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। त्योहारों पर कुछ पत्रकारों का कथित मीडियाकर्मियों का गिरोह अचानक सक्रिय हो उठा, शहर में चर्चा है कि गले में आई-कार्ड लटकाए और हाथ में माइक धागे यह लोग नेताओं, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, थानों और पुलिस चैकियों तक पहुंचकर नेग व उपहार के नाम पर जुट जाते है। त्योहारों के नाम पर चल रहे इस खेल से जहां आम नागरिक और अधिकारी परेशान है, वहीं निष्पक्ष और पेशेवर पत्रकारिता की छवि भी धूमिल हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि तथाकथित पत्रकार बिना बुलाए ही कैमरे और माइक लेकर धमक पड़ते है। इतना ही नहीं, शहर में कहीं भी बड़े आयोजन की भनक लगते ही झुंड वायरस की तरह पहुंच जाता है और खबरों की आड़ में वसूली पत्रकार का माहौल खड़ा कर देता है। शहर में चर्चा है कि वरिष्ठ पत्रकारों के सामने साख का संकट खड़ा हो गया है। इस गिरोहबंदी और अनैतिक हरकतों का सबसे बड़ा खामियाजा उन वरिष्ठ और वास्तविक पत्रकारों को भुगतना पड़ रहा है, जो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में विधिवत पंजीकृत हैं और वर्षों से ईमानदारी के साथ चौथे स्तंभ की मयार्दा बनाए हुए है। चर्चा है कि कुछ पत्रकारों की इस करतूत से पत्रकार को शक की निगाह से देखा जाने लगा है, जिससे वास्तविक मीडियाकर्मियों में भारी रोष है।









